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ज़िन्दगी के पहलू (3)

पढाई एक ऐसी चीज़ है जो बच्चे का भविष्य तय करती है अगर बच्चा डॉक्टर बनना चाह रहा है तो उसे वकालत करने पर क्यूं मजबूर किया जाये ।
                      ज़िंदगी बहुत कीमती होती है जो वक़्त गुज़र जाता है वो कभी लौटकर नहीं आता, अभिभावको को चाहिए की वह अपने बच्चों को ज़िन्दगी के तमाम पहलू जीने की आज़ादी दे देनी चाहिए एक हद के साथ । पढाई, पढाई के बाद नौकरी, शादी, बच्चे, बच्चों को पलना, फिर बच्चों की शादी, और फिर बूढ़े हो कर मर जाना सिर्फ यहाँ तक ही सीमित न करे, यह तब है जब ज़िंदा रहे यहाँ पहुँचने तक,अपने लिए ज़िन्दगी जी ही कहाँ, युवा वक़्त में लिया गया फैसला ही भविष्य को उस फैसले के अनुसार बना देता है।
                      ज़िन्दगी का हर पल जीने की कोशिश करनी चाहिए अपने हृदय की सुनकर मस्तिष्क की सुनकर न की लोगो की मुँह की सुनकर, हमारे आस पास जितने आदमी होते है वो सब अलग अलग विचार लिए होते है अगर लोगो के विचार में आ गए तो विमूढ़ होकर रह जाओगे । सबकी सुनो फिर सही फैसला करो ।
                      ज़िन्दगी पूरी इस्तेमाल करनी चाहिए बर्फ की सिल्ली की तरह जैसे बर्फ की सिल्ली होती है अगर उसे रखे तो वह थोड़ी कर कर के पिघलती जाती है चाहे उसे हम हाथ लगाये या न लगाये, जब बर्फ की सिल्ली पिघलनी ही है तो फिर इस्तेमाल करो , शर्बत बनाने मे, लस्सी बनने मे, पानी ठंडा करने मे । ज़िंदगी बर्बाद क्यों करे नशे करके, दिलो में नफरत रखके, एक दूसरे के खिलाफ साजिश रच कर, यह सब करना ऐसे है जैसे बर्फ की सिल्ली को फेंक देना ज़रुरत के बावज़ूद, बर्फ की सिल्ली जैसी तो है हमारी, ज़िन्दगी जियो या न जियो उम्र तो कम होती जा रही है । तो उम्र नफरत करके नहीं प्यार बाँट कर काटो ।

               ✒  आसिफ कैफ़ी सलमानी
       Written By - Asif Kaifi Salmani

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