Subscribe Us

header ads

ज़िन्दगी के पहलू (2)

पढाई के साथ साथ दुनियादारी कैसे ? अगर हमारे बेटे के अस्सी प्रतिशत नंबर न आये तो हम दुनिया को क्या मुंह दिखायगें, खान साहब क्या कहेंगे यह पढाई के साथ दुनियादारी पढ़ने वाला जरूरी समझे या न समझे लेकिन उसके माँ बाप जरूत समझते है । बहुत से अभिभावक तो ऐसे होते है जो अपने बच्चों को दुसरो के बच्चों से कॉम्पिटिशन करता है उसने बी सी ए में एडमिशन लिया तू बी टेक कर मुझे तो हंसी आती है ऐसे अभिभावको पर ।
                     यह बच्चे पर छोड़ देना चाहिए की वो किस क्षेत्र में भविष्य बनाना चाह रहा वो किस चीज़ मैं रूचि रखता है अभिभावको को कभी भी अपने सपने बच्चों पर नहीं थोपने चाहिए अगर बच्चा अपने सरंक्षक की बात मान कर वो करने भी लगता है तो उसका मस्तिष्क उसका भार नहीं सहन कर पाता फिर या तो पागल हो जाता है या मुर्ख बन जाता है मतलब आत्महत्या कर लेता है और अगर वो इस स्तिथि से निकल भी गया तो ज़िन्दगी में खुश नहीं रह पाता ।।              क्रमशः .............................

            ✒ आसिफ कैफ़ी सलमानी
Writeen By - Asif Kaifi Salmani

Post a Comment

0 Comments