Subscribe Us

header ads

मशीन के जज़्बात नही होते

दरवाज़े की डोरबेल बजाई बार बार लेकिन अंदर से कोई आवाज़ नही फिर ज़ोर ज़ोर से दरवाजा खटखटाया लेकिन फिर भी अंदर से कोई अवाज़ नही आखिर नक़ली चाबी का सहारा लेकर दरवाज़ा खोला गया अंदर कोई दिखाई नही दिया एक कमरे को खोला गया जहां का नज़ारा देखकर अच्छे अच्छे निडर को डर सकता था मजबूत दिल वाले का दिल पसीज़ सकता था शर्त यह है कि वो उस अंदर पड़ी सड़ी गली लाश का बेटा हो, है न अफ़सोस की बात मां कई हफ़्तों से मरी पड़ी है और बेटा अमेरिका से रुपए कमाकर नही नही डॉलर कमा कर वापस लौटा है और एक क्रोध वाली बात बताऊं बेटे ने मां से एक साल से ज़्यादा से बात भी नही की थी ।
              आपको लग सकता है कि यह मैंने कहानी गढ़ी है जो बहुत अच्छी है भावुक करने वाली है लेकिन मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं यह आज यानी रविवार सात अगस्त 2017 मुम्बई के ओशिवारा की सच्ची घटना है । है न हमारे आधुनिक काल के लिए शर्म की बात, हमारे आधुनिक काल की औलादों का कॉलर पकड़ कर झिंझोड़ती घटना क्या कुछ पैसों के लिए मां को छोड़ दिया जाता है और जो एक बात पता चली है वो यह है कि पति की मौत 2013 में हो चुकी थी और उसने अपने बेटे से कहा था कि अकेली का मेरा मन नही लगता तू मुझे ओल्ड ऐज होम में भर्ती करा दे लेकिन इस को डाल दिया गया होगा और अपनी इंजीनियरिंग में मस्त होगा इंजीनियर बेटा आधुनिकता तो बढ़ती जा रही है लेकिन इंसानियत ख़त्म होती जा रही है ।
मशीनों के भी जज़्बात होते है क्या, तुम भी कुछ नहीं मियां।
          ✒ आसिफ कैफ़ी सलमानी
             Written By - Asif Kaifi Salmani

Post a Comment

0 Comments