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महिलाओं की आज़ादी - लेख

औरतों को ग़लत नज़र से देखा जाता है, उन पर फब्तियां कसी जाती है और उनके साथ ग़लत व्यवहार किया जाता है तो बिला शुबहा उन देखने वालों की गंदी नज़र और उनको मिले गंदे संस्कार इसके लिए ज़िम्मेदार है लेकिन यह सौ फीसद कारण नहीं है इसमें कुछ फीसद हिस्सा कामुकता परोसने वालों का भी है और यह कोई और नहीं फेमिनिस्ट बनने वाले ही है
               मेरे सामने यूट्यूब देखते हुए एक गाना आया जिसमें तीन तीन अभिनेत्रियों को बहुत छोटे छोटे कपड़ों में नचाया हुआ था और उस गाने के बोल भी बड़े गंदे थे और जिसकी कम्पनी ने यह गाना रिलीज़ किया है वो प्रोड्यूसर और डायरेक्टर ऐसी है जो अपने सीरियल और फिल्मों में महिलाओं को नंगा करके दिखाती है और महिलाओं की आज़ादी और फेमिनिस्म की बात करती है अगर यह आज़ादी है तो महिलाओं को ऐसी आज़ादी से परहेज़ करना चाहिए और इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए क्योंकि सबसे ज़्यादा नुकसान महिलाओं की छवि को इससे ही पहुंच रहा है और यह बात मैं ऐसे ही नहीं कह रहा हूँ यह बात साबित हो चुकी है जैसे पोर्न फिल्मों से समाज में बिगाड़ और नौजवानों में उत्सुकता बढ़ती है और वो कामुकता देखने और उसे दोहराने के लिए लालायित रहते हैं ठीक वही काम फ़िल्म और गानों में जिस्म दिखाती औरतों को दिखा कर किया जा रहा है अब फिल्मों को तो सर्टिफिकेट दे दिया जाता है लेकिन यूट्यूब और अन्य सोशल साइट्स पर यह नहीं किया जाता वहाँ हर उम्र का बच्चा या बड़ा यह देख रहा है ... महिलाओं और पुरुषों को इस पर आवाज़ उठानी चाहिए और यह फेमिनिस्म की आड़ में नग्नता परोसने को बंद किया जाना चाहिए ।
महिलाओं की आज़ादी इसमें है कि उन्हें नग्नता परोसने की चीज़ समझना और उस नग्नता का लुत्फ उठाना बन्द किया जाए ।

             ✒ आसिफ कैफ़ी सलमानी
             Written By - Asif Kaifi Salmani

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