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चंद अशआर / जमाल हाशमी

1.
तर्ज़े बयानी आपकी , अंदाज़ आपका
जी चाहता है आपकी आवाज़ चूम लूँ

2.
पास रहेगी हुस्न की दौलत कितने दिन
ढा सकता है कोई कयामत कितने दिन
खून रगो में है तो एक दिन उबलेगा
सह सकता है कोई ज़िल्लत कितने दिन

3.
जो नहीं जानता इख़्लास-ओ-मोहब्बत क्या है
ऐसे  इंसान  से  मिलने  की  जरूरत  क्या  है

4.
बीच राहों में ही सांसों के ठहर जाने का डर
चैन से जीने नही देता है मर जाने का डर

5.
 मरासिम टूटने का दिल में इतना ख़ौफ़ रहता है
 सिलाई पर भी मैं अक्सर सिलाई करता रहता हूँ

✒️ जमाल हाशमी


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