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दिल का पैमाना मोहब्बत से भरा रहने दिया - ग़ज़ल/जमाल हाशमी

दिल  का पैमाना मोहब्बत से  भरा रहने  दिया
मैंने सोना  जो खरा  था  वो  खरा  रहने  दिया

इक  दिया  मैंने  अंधेरे  में  जला  रहने   दिया
उसकी  तस्वीर को कमरे में  सजा  रहने दिया

आंधियां ऐसी गुलिस्तां में चली अब के  बरस
कोई  पत्ता  भी न  शाख़ों  प  हरा  रहने दिया

मैंने भी  अब के  पलट कर  उसे  देखा ही नहीं
दिल में जो उसके था कांटा वो चुभा रहने दिया

मैंने  इस  तरह  से  ख़ुशबू  की  पज़ीराई  की
देर  तक  फूल  को  सीने  से लगा  रहने दिया

कर दिया तर्के तआलुक़ तो जमाल उससे मगर
एक  दरवाजा  हमेशा   ही  खुला   रहने   दिया

✒️ जमाल हाशमी

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